लखनऊ।कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच लॉकडाउन में भी लोगों की लापरवाही प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द हो रही है। हाल ही में दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज से देशभर के लिए निकले तब्लीगी जमात के लोग उत्तर प्रदेश में भी भी आए हैं। प्रदेश के विभन्न शहरों तथा गांव में इन सभी को मस्जिदों में शरण मिली है। तब्लीगी से लौटे लोगों में कोरोना वायरस के पॉजिटिव केस मिलने से यह सभी अब मानव बम समान है। सीएम योगी आदित्यनाथ आगरा तथा मेरठ का दौरा रद कर लखनऊ पहुंचे और अधिकारियों से प्रदेश भर में तब्लीगी जमात में शिरकत करने वाले लोगों की तलाश करने के साथ ही इन सभी को क्वारंटाइन करने का निर्देश भी दिया है। दिल्ली से बीते दिनों बिना स्वास्थ्य परीक्षण कराए कामगार उत्तर प्रदेश में आ गए। उन हालात को जैसे-तैसे संभालने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए दिल्ली ने एक बार फिर नई चुनौती खड़ी कर दी है। निजामुद्दीन के मरकज से देशभर के लिए निकले तब्लीगी जमात के लोग उत्तर प्रदेश में आए हैं। दिल्ली की घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तब्लीगी जमात वालों को जल्द तलाशें और वह प्रदेश में जहां भी मिलें, वहीं क्वारंटाइन कर दिए जाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में लॉक डाउन का पूरी तरह पालन हो, इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी की जमात से जुड़े हुए लोगों की तेजी से तलाश की जाए। जहां मिलें, उन्हें तत्काल क्वारंटाइन किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता पढ़ने पर आपात सेवा के लिए रिटायर्ड आर्मी मेडिकल अफसरों के साथ ही साथ पूर्व स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सेवा लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास उन लोगों का पूरा आंकड़ा मौजूद हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश की सीमाओं से प्रदेश के अंदर अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया है। इन सभी लोगों को हर हाल में चिन्हित कर लिया जाए। इनको हर हाल में क्वारेंटाइन रखा जाए। प्रदेश के जिन जिलों में कोरोना संक्रमण के मरीज ज्यादा पाए गए हैं, वहां की व्यवस्थाओं जायजा लेने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को निकले थे। गौतमबुद्धनगर के साथ ही दिल्ली में यूपी भवन में व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ मंगलवार सुबह गाजियाबाद पहुंचे। इसके बाद उन्हें मेरठ और फिर आगरा जाना था लेकिन, इतने में ही मामला सामने आ गया कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल होकर तबलीगी जमात के सैकड़ों लोग देशभर में बिना स्वास्थ्य परीक्षण के चले गए। उनमें तमाम कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इनमें उत्तरप्रदेश के निवासी भी शामिल हैं। यह जानकारी मिलते ही सीएम योगी आदित्यनाथ तुरंत लखनऊ लौट आए और अपने सरकारी आवास पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान बैठक में मुख्यमंत्री ने खासतौर पर सभी जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को यह निर्देश दिए कि किसी भी जनपद में सामानों की ओवर रेटिंग नहीं होने दी जाए। जिस प्रकार कुछ जलिों में अधिकारियों ने स्वयं बाजारों में उतरकर जमाखोरों कालाबाजारी करने वालों और ओवररेटिंग करने वालों के खलिाफ कड़ी कार्रवाई की , उसी प्रकार सभी अधिकारी अपने दायित्वों का पालन करें। बैठक में योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा कि पूरे प्रदेश में लॉकडाउन का पूरी तरह पालन हो। इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि तबलीगी की जमात से जुड़े हुए लोगों की तेजी से तलाश की जाए। वे जहां मिलें, उन्हें तत्काल क्वारंटाइन किया जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर आपात सेवा के लिए रिटायर्ड आर्मी मेडिकल अफसरों के अतिरिक्त पूर्व स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भी सेवा लें। बाहरी राज्यों में मौजूद उत्तरप्रदेश के नागरिकों की पूरी मदद की जाए। उनके भोजन आदि का प्रबंध अवश्य कराया जाए। उन्होंने कहा कि संस्थानों के मालिक अपने कर्मचारियों और श्रमिकों के भोजन का हर हाल में प्रबंध करें। यदि वह नहीं कर पा रहे तो प्रशासन को सूचित करें। प्रदेश में कोई भी भूखा नहीं रहना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राशन वितरण प्रणाली और बैंकों से लेन-देन के दौरान भीड़ इकट्ठा न होने दी जाए। पुलिस और होमगार्ड के जवानों की मदद से सारे हेल्थ प्रोटोकॉल पूरे कराए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास उन लोगों का पूरा आंकड़ा मौजूद है, जिन्हें यूपी की सीमाओं से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया है। इन सभी लोगों को हर हाल में चिन्हित कर क्वारंटाइन रखा जाए। इसके अलावा हर जिले में बड़ी संख्या में आश्रय स्थल बनाया जाएं। जो लोग भी लॉकडाउन का पालन करते हुए न दिखें और आश्रयहीन हों, उन्हें इन आश्रय स्थलों में रखें। जिन आश्रय स्थलों में सौ से ज्यादा लोग हों, वहां पर कम्युनिटी किचन शुरू करें और जहां सौ से कम लोग हैं, वहां उनके लिए भोजन पैकेट का इंतजाम किया जाए।